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नियंत्रित निर्माण
क्षेत्र भवन , विनियम 2000
राजस्थान सरकार
नगरीय विकास विभाग जयपुर
क्रमांकः-
दिनांक:
राजस्थान नगर सुधार अधिनियम, (1959 का अधिनियम संख्या 35) की धारा
75 के खण्ड (एच) के साथ पठित धारा 72 एवं 73 द्वारा प्रदत्त शक्तियों
का प्रयोग करते हुए नगर विकास प्रन्यास, उदयपुर एतद्द्वारा
निम्नलिखित विनियम बनाता है।
1 संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ तथा परिभाषाऐः-
(i) ये विनियम नगर विकास प्रन्यास, उदयपुर ( नियन्त्रित निर्माण
क्षेत्र भवन) विनियम, 2000 कहलायेगें।
(ii) ये विनियम राज पत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत होंगे। ये
विनियम निजी, सरकारी, अर्द्ध सरकारी, धार्मिक, क्लब, स्वयं सेवी
संस्थाऐं इत्यादि सभी प्रकार की भूमि एवं भवनों के लिये उदयपुर
न्यास क्षेत्र एवं धारा 299 नगर पालिका अधिनियम, 1959 के अधीन इस
निमित्त जारी अधिसूचना के क्षेत्र तक विस्तारित एवं लागू होंगे।
(iii) इन विनियमों में प्रयुक्त शब्दो की परिभाषाऐं जब तक विषय तथा
संदर्भ द्वारा अन्यथा अपेक्षित नहीं हो, वे ही होंगी जो की नगर
निकास प्रन्यास उदयपुर (नगरीय क्षेत्र भवन) विनियम, 1999 में
परिभाषित की गई है।
2 भवन निर्माण की अनुमति हेतु सक्षम अधिकारीः-
(i) अधिसूचित नियन्त्रित निर्माण क्षेत्र में भवन निर्माण स्वीकृति
नगर विकास प्रन्यास एवं नगर परिषद द्वारा निर्धारित प्रकिया अनुसार
अपने अपने क्षेत्राधिकार में जारी की जायेगी।
(ii) भवन निर्माण की स्वीकृति मास्टर प्लान/प्रारुप मास्टर प्लान/योजना
प्लान या राज्य सरकार की स्वीकृति, जैसी भी स्थिति हो, में
प्रस्तावित भू-उपयोग के अनुसार दी जावेगी, अन्यथा नहीं।
3 नियन्त्रित निर्माण क्षेत्र के जोन:-
नियन्त्रित निर्माण क्षेत्र को नीचे वर्णित भौगौलिक सीमा के अनुसार
जोन्स में विभाजित किया गयाः-
(i) जोन एक का क्षेत्र-
फतहसागर झील के उच्चतम भराव स्तर तक डूब में आनेवाली सम्पूर्ण भूमि
तथा रानीरोड पर ओ टी सी योजना में शमशान रोड से पश्चिम दिशा का
क्षेत्र, जिसमें ओ टी सी, ओ टी सी –डी- ब्लाक एवं हरीजन बस्ती तथा
कच्ची बस्ती को बाहर छोडते हुए एवं चर्च, मस्तान बाबा दरगाह, रोटरी
भवन, रानी विलेज, संजय पार्क, नेहरु पार्क, सौर वैध शाला, सर्व श्री
हिरण, सिंघवी एवं बापना की वाडी, डेयरी फार्म, श्री मिट्ठा तथा श्री
खेतान की बाडी, मोती वाटिका, डां. कंचन अग्रवाल की बाडी एवं धोरिया
मगरा नामी क्षेत्र को सम्मिलित करते हुए, बडी रोड तक के मध्य का
सम्पूर्ण क्षेत्र।
(ii) नीमच माता पहाड का सम्पूर्ण क्षेत्र, जिसमें पुलिस विभाग की
बंजड भूमि विकास समिति की बंजड भूमि, सौर वैधशाला की भूमि, ए आर सी
कार्यालय भवन, वन विभाग की नर्सरी एवं विश्रान्ति गृह, सिंचाई
विभाग, जलदाय विभाग, की सम्पूर्ण भूमि तथा गढी राव की मगरी नामी
भूमि (खसरा नम्बर 2535 देवाली) का सम्पूर्ण क्षेत्र सम्मिलित है।
(iii) फतहसागर की पाल के उत्तरी गेट से दक्षिण में फतहसागर ओवर फूलो
गेट होते हुए आगे प्रताप स्मारक (मोती मगरी) सर्किट हाउस, लक्ष्मी
विलास होटल, सिंगल हाउस, पम्प हाउस, आनन्द भवन एवं डाक बंगला तथा
वोलकेम कार्यालय, सहेलियों की बाडी एवं इम्पीरियल डेयरी की बाडी
नामी भूमि का सम्पूर्ण क्षेत्र जो की पश्चिम दिशा में फतहसागर की
पाल तक विस्तारित है।
पिछोला झील-
पिछोला झील के उच्चतम भराव स्तर तक डूब में आने वाली सम्पूर्ण भूमि
तथा लेक पैलेस, जग मन्दिर, मोहन मन्दिर एवं झील में स्थित समस्त
टापू, श्री माणिक्यलाल वर्मा पार्क, श्री दीनदयाल उपाध्याय पार्क,
जलबुर्ज, खास ओदी क्षेत्र व वन विभाग की सम्पूर्ण भूमि को सम्मिलित
करते हुऐ सीसारमा गांव की आबादी तक का क्षेत्र। यहाँ से सीसारमा
गांव की आबादी को बाहर छोडते हुए उत्तर दिशा में राता खेत एवं ओ टी
सी ‘बी’ ब्लाक की आबादी को बाहर छोडते हुऐ स्म्पूर्ण क्षेत्र। यहाँ
से आगे पूर्व दिशा में वर्तमान ईटं भट्टा की भूमि, हरीदास की मगरी
नामी भूमि में, लेक पैलेस होटल्स एवं मोटल्स प्रा. लि. की स्वयं की
भूमि, लेक पैलेस होटल्स एवं मोटल्स द्वारा इस्ट इण्डिया होटल्स प्रा.
लि. को लीज पर दी गयी भूमि (ट्राईडेण्ट/उदय कोठी ओबेराय होटल) जो
कि राजस्व ग्राम उदयपुर के खसरा नं. 148 में पिछोला झील के किनारे
किनारे दक्षिणी एवं पश्चिम भाग पर स्थित है तथा इसी खसरा नम्बर का
पूर्वी हिस्सा जो कब्रिस्तान के दक्षिण में पिछोला के किनारे स्थित
है जिसमें श्री गट्यानी एवं पूर्व महाराणा की भूमि तथा ब्रहमपोल
बाहर के कब्रिस्तान की संपूर्ण भूमि सम्मिलित है।
उदयपुर शहर के खसरा नम्बर 361 की भूमि जो कि नागानगरी के नाम से
जानी जाती है उसका दक्षिणी पश्चिमी हिस्सा जिसमें धनेरिया की बाडी,
डा. विश्वनाथ की बाडी, श्री मुंकद लाल जी प्यार जी की बाडी, शिव
मन्दिर, श्री माथुर की बाडी, होटल विजन तथा इसकी पूर्व दिशा में
स्थित श्री माथुर व श्री सोनी की बाडी एवं घाट मन्दिर तथा इसके
उत्तर में स्थित खुला क्षेत्र सम्मिलित है। जोन एक के क्षैत्र को
संलग्न परिशिष्ठ चार में नीले एवं हरे रंग से दर्शाया गया है।
(iv) जोन एक में भवन निर्माण के मापदण्ड :-
नियंत्रित भवन निर्माण के उद्देश्यों से जोन एक को उपजोन में इस
प्रकार से विभाजित किया जाता है -
जोन एक उप जोन ‘अ’
पिछोला एवं फतहसागर तथा इनसे जुडी झील के उच्चतम भराव स्तर दी सीमा
तक पानी की डूब में आने वाली ऐसी समस्त भूमियां जिसको सिंचाई विभाग
ने डूब क्षैत्र की भूमि निर्धारित की है, सम्मिलित होगी।
जोन एक उप जोन ‘ब’
जोन एक के उप जोन ‘क’ में वर्णित डूब की समस्त भूमियों को छोडने के
बाद शेष बची जोन एक की समस्त भूमि, उप जोन ‘ब’ में सम्मिलित होगी।
जोन एक के लिये भवन मापदण्ड निम्न प्रकार लागू होगे :-
(क) जोन का एक उप जोन ‘अ’ जोन एक के उप जोन ‘अ’ में स्थित समस्त
राजकीय एवं निजी भूमि पर समस्त प्रकार के निर्माण भू-उपयोग
परिवर्तन तथा भूमि रुपान्तरण पर प्रतिबन्ध होगा। इस क्षैत्र में
किसी भी प्रकार का निर्माण भू-उपयोग परिवर्तन एवं भूमि रुपान्तरण
अथवा उसके स्वरुप में परिवर्तन की स्वीकृत विशेष परिस्थितियो के
विद्यमान रहते हुए राज्य सरकार की अनुमति से अनुज्ञेय होगी। इस जोन
में सभी प्रकार के निर्माण कार्य प्रतिबन्धित होंगे। झीलो के उचित रख-रखाव
हेतु सिर्फ आवश्यक मरम्मत कार्य एवं झीलो को गहरा करने का कार्य
राज्य सरकार की स्वीकृति पर किया जा सकेगा।
(ख) जोन एक का उप जोन ‘ब’ विद्यमान मास्टर प्लान/प्रारुप मास्टर
प्लान/योजना प्लान या राज्य सरकार की विशेष स्वीकृत के अध्याधीन
रहते हुए इस क्षैत्र में भूमि रुपान्तरण, नियमन, भू-उपयोग परिवर्तन
एवं भवन निर्माण की स्वीकृति संबंधित स्थानीय निकाय के प्रस्ताव पर
राज्य सरकार की स्वीकृति के उपरान्त ही दी जा सकेगी। ऐसे भूखण्डो
पर भवन निर्माण स्वीकृति देते वक्त यह सुनिश्चित किया जायेगा कि
भूखण्ड पर कुल निर्मित क्षैत्र 35 प्रतिशत से अधिक नहीं हो परन्तु राज्य
सरकार प्रकरण विशेष में दोष गुण के आधार पर इसे कम भी कर सकेगी।
(v) जोन दो का क्षैत्र -
फतहसागर झील – अम्बावगढ योजना, जिंक कोलोनी, खुडाला हाउस, सलुम्बर
हाउस, कुराबड हाउस नामी भूमि अम्बावगढ कच्ची बस्ती, यादव बस्ती,
अम्बामाता योजना, भटृवाडी, मास्टर कोलोनी, अल्कापुरी, ओ. टी. सी.
विस्तार योजना, ओ. टी. सी.- ‘डी’ ब्लाक, कालवेलिया कोलोनी, हरिजन
बस्ती एवं सज्जन नगर का संपूर्ण क्षैत्र।
पिछोला झील – ब्रहमपोल बाहर का क्षैत्र जिसमे वैद्य छ्गनलाल की बाडी
जेठीयो की बाडी, हरिदास जी की मगरी नामी भूमि का बाहरी क्षैत्र,
एकलव्य कोलोनी, ओ. टी. सी. योजना के ब्लाक ‘ए’ एवं ‘बी’ का क्षैत्र
एवं राताखेत आबादी का क्षेत्र सम्मिलित है। संलग्न परिश्षिट चार का
मानचित्र जो इन विनियमों का भाग है, में भूरे रंग से इस जोन को
दर्शाया गया है।
(vi) जोन दो में भवन निर्माण के मापदण्ड:- जोन द्वितीय के लिये भवन
निर्माण स्वीकृति परिशिष्ट एक मे वर्णित मापदण्डों के अनुसार एवं
इन विनियमों में वर्णित शर्तो के अधीन होगी।
(vii) जोन तीन का क्षैत्र - अधिलूचित नियंत्रित निर्माण क्षैत्र की
सीमा में पिछोला, रंगसागर, स्वरुपसागर की तरफ के प्राकृतिक ढलान
वाला सम्पूर्ण का क्षैत्र समोरबाग, राजमहल, नागानगरी का जोन एक में
वर्णित क्षैत्र को छोडते हुए शेष संपूर्ण क्षैत्र तथा चांदपोल,
अम्बापोल एवं के अन्दर का क्षैत्र सम्मिलित है। संलग्न परिशिष्ट
चार का मानचित्र जो इन विनियमों का भाग है, मे इस क्षेत्र को पीले
रंग से दर्शाया गया है।
(viii) जोन तीन में भवन निर्माण के मापदण्ड - इस क्षेत्र के
अन्तर्गत अधिकांशतया नगर परिषद उदयपुर क्षैत्राधिकार का क्षैत्र
सम्मिलित है। इस घनी आबादी क्षैत्र के मौजूदा स्वरुप को दृष्टिगत
रखते हुए वर्तमान में खाली भूखण्डों पर स्वीकृति देते समय इस
क्षैत्र के वास्तुकलात्मक स्वरुप, वर्तमान भू-उपयोग एवं आच्छादित
क्षैत्र को ध्यान में रखते हुए संलग्न परिशिष्ट दो के मापदण्ड
अनुसार भवन निर्माण की स्वीकृति देय होगी।
5 अधिसूचित निर्माण निंयत्रित क्षैत्र में निर्माण अनुज्ञा की
विशेष शर्ते व प्रतिबन्ध :-
(i) इस क्षैत्र में जहाँ इन विनियमो के तहत भवन निर्माण अनुज्ञेय
होगा वही आबादी भूमि पर निर्माण एवं पुनर्निमाण की स्वीकृति उस
क्षैत्र के वास्तुकलात्मक स्वरुप, स्काई लाईन आदि की समरुपता को
बनाये रखते हुए अनुज्ञेय होगी।
(ii) इन विनियमो के अध्यधीन जारी निर्माण स्वीकृति की शर्तो मे से
किसी एक या अधिक के आंशिक या पूर्ण उल्लंद्यन की स्थिति मे निर्माण
स्वीकृति स्वत: सीमित (deferred) ही जावेगी। किन्तु शर्त की पालना
करने के पश्चात् भू-स्वामी को इस निमित निर्माण स्वीकृति बहाल कराने
हेतु आवेदन करने का अधिकार होगा।
(iii) जिन क्षैत्रो मे सिवर लाईन उपलब्ध है वही सिवर कनेक्शन लिया
जाना अनिवार्य होगा। जहाँ सिवर लाईन उपलब्ध नहीं है उन क्षैत्रो
में सेफिट्क टेक एवं सोकपिट का अतिरिक्त निर्माण करना होगा।
(iv) इस क्षैत्र में भूतल+दो मंजिल से अधिक उंचाई के बहुमंजिले
आवासीय, व्यावसायिक या संस्थागत परिसर, अनुज्ञेय नही होगे इसके
अलावा थोक व्यापार केन्द्र एवं वेयर हाउसिंग, तथा ओद्योगिक भवन
निर्माण की स्वीकृति अनुज्ञेय नहीं होगी।
(v) इस अधिसूचित नियंत्रित निर्माण क्षैत्र में वर्तमान मे कार्यरत
होटलो/रिसोर्टस/गेस्ट हाउस आदि के नियमन एवं विस्तार की तथा नवीन
होटल, रिसोर्टस एवं गेस्ट हाउस आदि के निर्माण की स्वीकृति
विद्यमान प्रारुप मास्टर प्लान/मास्टर प्लान/योजना प्लान या राज्य
सरकार की स्वीकृति के प्रावधानों के अनुसार राजस्थान राज्य प्रदुषण
निंयत्रण मण्डल की अनापत्ति पर ही अनुज्ञेय होगी।
(vi) राज्य सरकार एवं प्रन्यास द्वारा इस क्षैत्र के संरक्षण एवं
विकास बाबत और कोई प्रतिबन्ध यदि लगाया जाता है तो, वे इन विनियमो
का अंग माने जायेगे।
(vii) जिन तथ्यों एवं मापदण्डो का इन विनियमो में उल्लेख नही है,
उन मामलो में नगर विकास प्रन्यास,
उनयपुर(नगरीय क्षैत्र भवन) विनियम, 1999 प्रावधान लागू होगे।
(viii) निंयत्रित निर्माण क्षैत्र में व्यापक जनहित को ध्यान रखते
हुए विशिष्ट भवनो के निर्माण बाबत् स्थानीय निकाय की अनुशंसा पर
राज्य सरकार स्वीकृत प्राप्त होने के उपरांत ही भवन निर्माण
स्वीकृति दी जा सकेगी।
(ix) इन विनियमों के विषयो पर प्रन्यास, नगर परिषद एवं राज्य सरकार
द्वारा समय समय पर जारी किये गये
आदेश/अधिसूचना, जहाँ तक वह इन विनियमो के प्रावधानो से असंगत नही
हो, विनियमो के भाग समझे जावेगे।
(x) राज्य सरकार द्वारा भवनो की उचाई, तल क्षैत्रफल, मंजिलो की
संख्या, सडको की चौडाई और वाहनो के लिये पार्किग स्थल तथा अन्य
किन्ही मामलो मे जो भी उचित विशेष प्रावधान हो, लागू किया जा सकेगा।
(xi) प्रन्यास एवं नगर परिषद द्वारा भवनों के वास्तुकला सबधी
स्वरुप तथा अभिकल्पना रंग एवं भवन सामग्री, विज्ञापन पटृ एवं चिन्हो
के संबंध मे निर्देश जारी किये जा सकेगे।
(xii) ऐसे भवन निर्माण जिस बाबत् विनियमो मे मानदण्ड निर्धारित नही
है उनके लिये एवं विशिष योजना के अन्तर्गत भवन निर्माण के लिये
राज्य सरकार/न्यास एव नगर परिषद द्वारा अलग से मानदण्ड निर्धारित
किये जा सकेगे।
(xiii) अधिसूचित निर्माण निंयत्रित क्षैत्र के जोन एक, दो व तीन मे
अधिसूचना जारी करने से पूर्व नगर परिषद/नगर विकास प्रन्यास व राज्य
सरकार द्वारा जारी स्वीकृतियां मान्य होगी एवं उनका नवीनीकरण किया
जा सकेगा। विधिक कारणो से यदि कोई कठिनाई हो तो विशेष परिस्थितियो
मे संशोधन राज्य सरकार के स्तर से किया जा सकेगा।
(xiv) विधि संगत किसी अन्य प्रावधानों के होते हुए भी इन विनियमो
के अन्तर्गत किसी भी प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध राज्य सरकार के
सम्मुख भी आदेश प्राप्ति के 90 दिवस मे अपील प्रस्तुत की जा सकेगी
और इस संबंध मे दिया गया राज्य सरकार का आदेश अंतिम माना जावेगा।
(xv) राज्य सरकार औचित्य के आधार पर किसी प्रकरण में इन विनियमो मे
उल्लेखित किसी प्रतिबंध और प्रावधान में छुट प्रदान कर सकेगी। |